चीन की छुट्टी अडानी समुद्र में बनाने जा रहे भारत का सबसे बड़ा ‘अड्डा’, 16000 करोड़ रुपये करेंगे खर्च!
Vizhinjam Phase 2 Development
तिरुवनंतपुरम (केरल): Vizhinjam Phase 2 Development: अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड (APSEZ) केरल के विजिंजम सीपोर्ट के दूसरे चरण के विकास कार्य को अंजाम देने जा रहा है. इस चरण पर लगभग 16,000 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है. सूत्रों के अनुसार, इस संबंध में आधिकारिक घोषणा शनिवार को होने वाले उद्घाटन समारोह के दौरान की जा सकती है. दूसरे चरण के विकास का उद्घाटन शनिवार शाम मुख्यमंत्री पिनराई विजयन द्वारा किया जाएगा.
अदाणी पोर्ट्स को उम्मीद है कि विजिंजम बंदरगाह का दूसरा चरण पूरा होने के बाद यह भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे बड़ा ट्रांसशिपमेंट हब बनकर उभरेगा. इस चरण के तहत बंदरगाह की मौजूदा क्षमता में 4.1 मिलियन टीईयू (ट्वेंटी-फुट इक्विवेलेंट यूनिट्स) की बढ़ोतरी होगी. इससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार में भारत की हिस्सेदारी और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता दोनों मजबूत होंगी.
सूत्रों का कहना है कि विजिंजम बंदरगाह पहले ही भारत का सबसे उन्नत और पूरी तरह स्वचालित ट्रांसशिपमेंट हब बन चुका है. दूसरे चरण में इससे भी अधिक उन्नत ऑटोमेशन तकनीक और अत्याधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया जाएगा. इस चरण में 21 ऑटोमेटेड शिप-टू-शोर (STS) क्रेन, 45 ऑटोमेटेड कैंटिलीवर रेल-माउंटेड गैन्ट्री (CMRG) क्रेन, एक आधुनिक रेल हैंडलिंग यार्ड तथा अत्याधुनिक इलेक्ट्रिकल और ऑटोमेशन सिस्टम शामिल होंगे.
दूसरे चरण की अन्य प्रमुख विशेषताओं में बर्थ विस्तार, ड्रेजिंग और रिक्लेमेशन के माध्यम से अतिरिक्त परिचालन क्षमता का निर्माण शामिल है. इसके साथ ही भारत का सबसे गहरा ब्रेकवॉटर भी बनाया जाएगा, जिसकी लंबाई 920 मीटर होगी और जिसकी गहराई 21 मीटर तक होगी. यह संरचना बंदरगाह को समुद्री लहरों से सुरक्षा प्रदान करेगी और बड़े कंटेनर जहाजों के संचालन को आसान बनाएगी.
पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इस चरण में ग्रीन उपकरणों की तैनाती भी की जाएगी. इनमें इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन, आधुनिक विद्युत सब-स्टेशन, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और अंतरराष्ट्रीय जहाज एवं बंदरगाह सुरक्षा (ISPS) फेंसिंग जैसी महत्वपूर्ण सुविधाओं का विकास शामिल है.
विशेषज्ञों के अनुसार, विजिंजम सीपोर्ट का दूसरा चरण न केवल केरल बल्कि पूरे देश की समुद्री अवसंरचना को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा और भारत को वैश्विक ट्रांसशिपमेंट मानचित्र पर एक मजबूत स्थान दिलाने में अहम भूमिका निभाएगा.